एक्स साली की चूत गांड की चुदाई का मजा


(Ex Sali Ki Chut Gand Ki Chudai Ka Maja)

प्यार की चाहत वो कर सकती है, जिसकी कोई कल्पना भी न करे. मेरी शादी एक बहुत ही सुन्दर लड़की से हुई. लेकिन शादी के एक साल बाद ही एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई. मेरी एक ही साली है शिल्पा, उससे मेरी शादी की बात हुई, तो उसने अकेले में मुझे बताया कि वो किसी और से प्यार करती है. मैंने उसकी भावनाओं का ध्यान रखते हुए घर वालों से शादी की मना कर दी. शिल्पा की शादी उसके प्रेमी विक्रम से हो गई. मेरी भी शादी दूसरी जगह हो गई.

समय बीतता गया, शिल्पा की शादी को 3 साल हो चुके थे. एक दिन अचानक फेसबुक पर उसका मैसेज आया. चूँकि अब उन लोगों से बहुत कम संपर्क रह गया था, इसीलिए मैं मैसेज देख कर थोड़ा चौंक गया. इतने दिनों बाद शिल्पा से बात हुई, तो लगा जैसे मैं पुराने समय में पहुँच गया.

फिर हमने फोन पर बात की, तो वो दुखी मन से कहने लगी- काश मैंने आपसे शादी की होती.
उसने बताया कि शादी के बाद उसके पति विक्रम की असलियत सामने आ गई. उसको जुए का शौक है, जिसकी वजह से सब बर्बाद हो गया. घर में हर समय क्लेश का माहौल बना रहता है.

शिल्पा से कुछ दिन बात करते करते जब वो मुझसे थोड़ा खुल गई, तो उसने बताया कि विक्रम सिर्फ अपनी जिस्म की भूख मिटाने के लिए मेरे पास आते हैं, उन्हें मेरी संतुष्टि से कोई मतलब नहीं होता. उनके मुँह और शरीर से हर वक्त शराब की बदबू आती रहती है.

शिल्पा से मेरी आत्मीयता बढ़ी तो मेरी उसके साथ फ़ोन पर बात होने लगी. हम दोनों के बात करने का सिलसिला शुरू हो गया. उसका दर्द और मेरी सांत्वना हमारे रिश्ते को नया मोड़ दे रहे थे.

हमारे परिवार अलग थे, इसीलिए कुछ सीमाएं थीं. लेकिन एक दूसरे की बढ़ती चाहतें हमारी इन सीमाओं को तोड़ना चाहती थीं. हम अपने शालीनता वाले रिश्ते को छोड़ कर अब प्रेमी प्रेमिका वाले रिश्ते बनाने में लग गए. फ़ोन पर हमारी बातों में मस्ती छाने लगी.
जब बातचीत से बेकरारी बढ़ी तो सब्र की इन्तेहां खत्म हुई और हमने मिलने का प्रोग्राम बना लिया. लेकिन कैसे मिलें, ये समझ नहीं आ रहा था.

फिर एक दिन मन की मुराद पूरी हुई. जब शिल्पा ने बताया कि विक्रम 3 दिन के लिए अपने दोस्तों के साथ घूमने जा रहे हैं.
बस फिर क्या था, तय दिन मैंने अपनी कार ली और उसके शहर पहुँच गया. सबसे पहले एक होटल में एक रूम बुक किया, फिर उसके लिए कुछ गिफ्ट ख़रीदे और उसको तय जगह पर रिसीव करने चल दिया.

मैंने एक शोरूम के आगे गाड़ी पार्क की. थोड़ी देर बाद शिल्पा उस शोरूम से निकली और सीधे मेरी गाड़ी में आकर बैठ गई.

सच में कितनी सुन्दर लग रही थी वो, बस उसके चेहरे पर हल्का सा डर का भाव था, साथ ही उसके चेहरे पर मिलन को लेकर हल्की सी मुस्कराहट भी थी.

इस समय गाड़ी में बैठते ही वो मुझसे बस इतना ही बोल पाई- जीजू, जल्दी चलिए … यहां से निकलिए.

मैं उसकी घबराहट समझ रहा था. मैंने गाड़ी होटल की तरफ मोड़ दी. होटल में हम पति पत्नी की तरह अपने रूम में पहुँच गए. मैंने एक दिन के लिए रूम बुक किया था, जबकि हमें सिर्फ दो घंटे ही रुकना था.

शिल्पा और मैं पलंग पर बैठे थे. हम दोनों अपनी घबराहट को कम करने के लिए बातें करने लगे. मैं उसे थोड़ा छेड़ने भी लगा, हमारे बीच जैसे एक चुम्बक सी काम करने लगी. हम एक दूसरे के काफी नजदीक आने लगे और धीरे धीरे एक दूसरे की बांहों में चिपक गए.

उसके बदन की महक से मानो वक़्त जैसे ठहर गया, हवाओं में ठंडक सी महसूस होने लगी. मैंने हिम्मत की और अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए. अब हम दोनों प्यार से एक दूसरे को किस कर रहे थे. साथ ही मेरे हाथ उसकी पीठ पर चल रहे थे. धीरे धीरे मैं अपने हाथ को उसकी कमर से नीचे उसके चूतड़ों तक ले गया और उसके चूतड़ों को दबाने लगा.

वो शर्म से कांपने लगी. उसके कंपकंपाते शरीर ने मेरे लंड में तरंग पैदा कर दी. मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर छा गया. जल्द ही मैंने उसके बूब्स ब्लाउज से आजाद कर दिए. आह कितने सॉफ्ट मम्मे थे, क्या बताऊँ यारो … मुझे तो बस यूं समझो, मजा ही आ गया.

उधर शिल्पा ने शर्म से आंखें बंद कर रखी थीं, जबकि उसके नंगे बूब्स हिलते हुए मुझे देख रहे थे. मैं तो बस उन्हें चूसने में लग गया और मेरे हाथ उसके कपड़े उतारने में लगे रहे.

दो पल में ही मैंने उसकी साड़ी ढीली कर दी और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. वो मुझमें सिमट सी गई. फिर मैं उठा और उसकी टांगों में फंसा अधखुला उसका पेटीकोट उतारने लगा. शिल्पा को पता नहीं था कि मैं पेटीकोट के साथ उसकी पेंटी भी खींच लूँगा. मैंने जैसे ही पेंटी खींची, वो लाज से सिमट गई और अपने हाथ से अपनी चूत छिपाने लगी.

वो शर्मोहया से सिमट रही थी और मैं बेशर्मी से उसके कपड़े उतार रहा था.

फिर मैं अपने कपड़े उतार कर जैसे ही उसके ऊपर लेटा, उसको जैसे करंट लगा हो, वो ऐसे हिल गई. उसने अपनी चूत पर हाथ रखा हुआ था, वहां मेरा लंड लगा, तो वो हड़बड़ा गई. मारे शर्म के वो मेरे सीने से लिपट गई. उसके हाथ उसकी चूत से हट चुके थे और अब मेरा लंड उसकी चूत पर मुँह मारने लगा था. मैं शिल्पा की गर्दन चूमने लगा, तो वो मदहोश होने लगी.

फिर उसने आंखें खोलीं और शरमाई निगाहों से आंखों के इशारे से कुछ कहा. मैंने उसका इशारा समझा और अपना लंड उसकी गीली चूत में उतार दिया. उसकी एक मदमस्त सी आह के साथ ही मेरा लौड़ा उसकी चूत की गर्मी और चिकनाहट से खेलने लगा. पहले मैंने धीरे धीरे, फिर थोड़ा तेज धक्के देना शुरू कर दिया. इस रंगीन चुदाई से हमारा पलंग हिलने लगा.

मैं शिल्पा को हचक कर चोदने लगा. मेरे लंड की चोटों से उसकी कमनीय काया मचलने लगी थी. होटल का अनजान कमरा हमारी मदहोश आवाजों का साथ देना लगा था. पूरा कमरा उसकी मधुर सिसकियों से गूंज रहा था.

चुदाई के इस खेल में लंड चूत के मध्य घमासान युद्ध चल रहा था. शिल्पा अपनी गांड उठाते हुए मुझे अपने अन्दर समाने की प्यास को उजागर करने लगी. ऐसा लग रहा था कि जाने वो मेरे प्यार को पाने के लिए कब से प्यासी हो. इस मधुर जंग में कभी वो मेरे ऊपर चढ़ जाती, कभी मैं उसके ऊपर छ जाता. कभी मैं शिल्पा को अपनी गोद में उठा कर चोदने लगता, तो कभी उसे घोड़ी बना कर चोदता. मैंने हर तरीके से शिल्पा को चोद कर संतुष्ट कर रहा था और शिल्पा खुद अपनी चूत को उचका उचका कर पूरा लंड अपने अन्दर ले रही थी.

अचानक ही शिल्पा एकदम से अकड़कर मेरे अन्दर सिमटने सी लगी. मैंने भी समझते हुए उसको अपनी बांहों की चादर से ढक लिया. वो एकदम से निढाल होकर कुम्हलाने लगी. मैं भी धराशायी होने लगा. मेरा सब माल शिल्पा की चूत को गर्म करने लगा. हम दोनों ढेर होकर एक दूसरे से चिपके हुए अपनी सांसों का संतुलन बनाने लगे.

थोड़ी देर बाद मैं उठा और बाथरूम में अपने मुरझाए हुए लोले को साफ़ करने लगा. कमरे में वापस आकर देखा कि शिल्पा उलटी होकर सोई हुई है. उसकी मुलायम गोल गोल गांड ने मेरे लंड को भड़का दिया. मैं उसकी पीठ पर और उसके मुलायम चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा. शिल्पा आंख बंद किये हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी. वो शायद बहुत थक गई थी.

मैं उसकी जांघों पर बैठ कर उसकी पीठ की मालिश करने लगा. मेरा लंड उसकी गांड से टच हो रहा था और वो पीछे से अपने पैर मोड़ कर मेरे चूतड़ों पर लात मार रही थी. शायद वो अपने पीछे के छेद के लिए भी मेरा साथ चाहती थी.

मैंने उसके पर्स से क्रीम निकाली और अपनी उंगली पर ले ली. फिर मैंने अपनी उस उंगली से शिल्पा की गांड के छेद पर क्रीम लगा कर अपनी उंगली अन्दर डालने लगा. तो उसने हल्की सी ‘अं..’ की आवाज के साथ अपनी गांड उचका ली. लेकिन फिर जल्द ही रिलैक्स हो गई. मैं कुछ देर तक आराम से अपनी उंगली को शिल्पा की मखमली गांड के छेद में अन्दर बाहर करता रहा.

थोड़ी देर बाद मैंने दो उंगलियां डालीं, तो वो फिर से उचकी. लेकिन वही कुछ देर बाद उसकी शिल्पा की गांड ने मेरी दोनों उंगलियों को रास्ता दे दिया. कुछ ही देर में उसकी गांड खुल गई थी और फूलते पिचकते हुए मेरे लंड के जाने लायक मुझे निमंत्रित कर रही थी.

फिर मैंने अपने लंड को भी चिकना किया और उसके गांड के छेद पर लगा दिया. मैंने थोड़ा सा दवाब बनाया, तो शिल्पा तो दर्द से फड़फड़ाने लगी. मैंने लंड बाहर निकाल लिया. थोड़ी देर बाद फिर लंड गांड के छेद पर लगा कर पुश किया, मगर वो फिर से फुदक गई. मैं भी कहां हार मानने वाला था. अबकी बार गांड पर लंड लगाने के बाद मैं उसके ऊपर लेट गया और लंड को थोड़ा थोड़ा आगे पीछे करने लगा. तभी उसकी गांड ने मुँह खोला और मेरा लंड धीरे धीरे उसकी गांड के अन्दर सरकने लगा. शिल्पा मचलने लगी. मैं अपना हाथ नीचे करके उसकी चूत को सहलाने लगा, तो वो मीठे दर्द से सिसकारने लगी.

जब मुझे लगा कि मेरा लंड थोड़ा सा उसकी गांड में चला गया है, तो मैंने अपना लंड पूरा घुसाने के लिए थूक टपका कर लंड का दवाब बना दिया. वो तो ऐसे कसमसाई कि वो मेरी पकड़ से निकल जाएगी, मगर मेरी पकड़ मजबूत थी.
वो ‘आ.. ऊ.. निकालो … प्लीज़ … छोड़ दो … उम्म्ह… अहह… हय… याह… दर्द हो रहा है … अइया …’ जैसी दर्द भरी आवाजें निकालती रही, मगर मैं उसकी चूत को सहलाता रहा और अपने लंड को उसकी गांड में पूरा डाल कर लेटा रहा.

जब लगा कि उसके ज्यादा दर्द हो रहा तो मैंने लंड बाहर निकाल लिया. उसको थोड़ा आराम मिला, मैं भी उसकी गांड को सहला रहा था.

कुछ देर बाद मैंने फिर से प्रयास किया. जब मैंने शिल्पा की गांड में लंड डाला, तो इस बार वो आराम से अन्दर सरक गया… हालाँकि उसको दर्द हुआ और उसका शरीर काँप भी रहा था, फिर भी मैंने उसकी गांड मारनी शुरू कर दी.
वो अब ‘बस.. निकाल लो…. आ.. आह.. उई..’ करती रही और मैं उसकी गांड मारता रहा.

होटल के इस एसी कमरे में भी हम पसीने से नहा गए. मैं धपाधप उसकी गांड मारता रहा और वो फुदकती रही. कुछ देर बाद मैंने उसकी गांड में ही माल छोड़ दिया और उसके ऊपर से हट गया.

शिल्पा मुझसे लिपटते हुए बोली- मैंने आज तक अपने पति से पीछे से नहीं मरवाई, आज पहली बार है. आज जैसा सुख मुझे पहले नहीं मिला. मैंने सोच लिया था कि आपको कुछ तो सीलपैक दूंगी.
हम दोनों इसके बाद लगभग आधे घंटे तक यूं ही लिपटे पड़े रहे. फिर उठकर नहाये और बाथरूम में भी मैंने उसको एक बार आगे से बजाया. वो मुझसे काफी खुश थी.

उसके बाद हमने होटल छोड़ दिया और ख़ुशी ख़ुशी अपने अपने रास्ते निकल पड़े.

इस सबके बाद मुझे न जाने क्यों उससे बार बार मिलने की चाहत होने लगी. देखो अब कब मौका मिलता है.

आपको मेरी ये सच्ची जीजा साली सेक्स की कहानी कैसी लगी.. मुझे मेल करके जरूर बताइएगा.
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