तलाकशुदा माँ की अगन-2


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(Talaqshuda Maa Ki Agan- Part 2)

इस इन्सेस्ट कहानी के पहले भाग
तलाकशुदा माँ की अगन-1
में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी माँ और भी को सेक्स करते पकड़ा. उसके बाद मेरी माँ बताने लगी कि उसने ऐसा क्यों किया.
अब आगे:

मैंने करण के साथ नज़दीकियां बढ़ानी शुरू कर दीं और उसे बाहर जाने के लिए कहा। फिर हम लोग हर दिन बाहर जाने लगे।
एक दिन करण ने मुझसे पूछा कि मैं हर दिन क्यों बाहर जाना चाहती हूँ क्योंकि मैं पहले ऐसा नहीं चाहती थी।
मैंने तब जवाब दिया कि मैं अपने पति के बिना घर पर अकेली महसूस करती हूँ और तेरे साथ रहने में खुशी महसूस करती हूँ। करण को ख़ुशी महसूस हुई कि मैं अब सामान्य थी और फिर से अपने जीवन का आनंद लेने लगी थी।

उसके बाद एक दिन मैंने आगे जाने का फैसला किया और रात के दौरान जब करण अपने रूम में नंगा लेटा था हमेशा की तरह, मैंने कमरे में प्रवेश किया और उसे अपने लन्ड को मुठ मरते हुए पकड़ लिया।
करण मुझे देखकर चौंक गया और उसके पास खुद को ढकने के लिए बिस्तर पर कुछ भी नहीं था। लेकिन मैं उस समय उसके लंबे और उभरे हुए लन्ड को देख रही थी और फिर अपने कमरे में वापस चली गई।

अगली सुबह मैं करण के बात करने की प्रतीक्षा कर रही थी और फिर करण आ गया लेकिन वह मेरी आँखों में नहीं देख पा रहा था और कारखाने चला गया। वह हर दिन की तरह दोपहर के भोजन के लिए घर आया और मैं भी अपने इरादे स्पष्ट करना चाहती थी और स्नान करके बैडरूम में नंगी ही बैठी थी और करण का इंतज़ार कर रही थी।

तभी दरवाज़े पर घंटी सुनकर मैंने खुद को एक तौलिये से लपेट लिया जिससे मेरे बूब्स और गांड तक का हिस्सा ढक गया था और बाथरूम जाकर खुद को पूरा गीला कर लिया जिससे तौलिया गीला होकर मेरे कामुक जिस्म से चिपक गया था और मेरा शरीर तौलिये के अंदर से चमक रहा था।

फिर मैंने जल्दी से दरवाजा खोला और करण मुझे इस तरह देख कर दंग रह गया क्योंकि पहली बार उसने मेरा आधा नंगा पानी में भीगा हुआ शरीर देखा था।
कुछ सेकंड के बाद मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा और कहा कि मुझे स्नान करने में देर हो गई है और फिर कपड़े बदलने के लिए अपने कमरे में चली गई। मैंने दरवाजा बंद नहीं किया था तो कारण चुपके से आकर मुझे कपड़े बदलते हुए देखने लगा।

मैं जानती थी कि करण मुझे देख रहा है और मैं उसे अपने नग्न शरीर को दिखाना चाहती थी जो उसे मुझे चोदने के लिए उत्साहित करेगा। मैं बड़े दर्पण के सामने खड़ी हो गई और फिर तौलिया गिरा दिया और अपने सेक्सी शरीर को देखने लगी। मैं वहाँ खड़ी होकर उसे उत्तेजित करने के लिए थोड़ी देर तक अपने पेट और स्तन को छूती रही और फिर ब्रा और पैंटी पहने बिना साड़ी पहन ली।

मुझे तैयार देखकर करण हाल में चला गया और मैं भी हाल में पहुँचकर उसे खाना परोसने लगी। खाने के दौरान करण काफी उत्तेजित था क्योंकि मेरे निपल्स पारदर्शी काले ब्लाउज से दिख रहे थे और करण उन्हें देख रहा था और उसके पैंट में एक उभार था।

उसने जल्दी से अपना खाना पूरा कर लिया।

मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ बात करनी है और मैं उसके सामने बैठ गई और उससे पूछा कि कल रात जब मैं उसके कमरे में आई थी तो वह क्यों डर रहा था। वह चुप था और एक शब्द भी नहीं कह रहा था और नीचे देख रहा था।
उसे असहज देखकर मैंने कहा कि मैं गुस्सा नहीं हूँ और कहा कि जब आप उत्तेजित हो जाते हैं तो यह आपकी उम्र के लड़कों के लिए बहुत सामान्य है।

मेरी बात सुनकर करण को थोड़ा बेहतर लगा और उसने मेरी तरफ देखा। करण की नज़र मेरी साड़ी के अंदर स्तन के बीच में थी और मेरे दूधिया सफेद स्तन उभरे हुए निप्पलों के साथ दिखाई दे रहे थे, जो उसके लन्ड को पूरी तरह से सख्त कर रहे थे और जो कि उसकी जींस के ऊपर दिखाई दे रहा था।

मैंने फिर कहा कि मुझे लगता है कि तुम कल रात की तरह फिर से उत्तेजित हो गए हो और हँसने लगी। करण होश में आया और उसने देखा कि उसका लन्ड जींस में ही खड़ा है और शर्मिन्दगी महसूस करने लगा। उसने अपने हाथ से अपना पैंट ढक लिया।

उससे मैंने पूछा कि अब वह क्यों उत्तेजित हो रहा है क्योंकि अभी तो कमरे में कोई पोर्न भी नहीं चल रहा है। करण थोड़ी देर के लिए चुप रहा और फिर मुझसे बोला कि अभी उसने मुझे रूम में कपड़े बदलते हुए देखा था।

मैंने भी कहा कि मैं भी एक हफ्ते से उसे रात में मुठ मारते हुए देख रही थी। इससे करण चौंक गया और मेरी तरफ देखने लगा। तब मैंने उससे कहा कि मुझे तुझे मुठ मरते देखकर अच्छा लगता है और तेरा लन्ड भी पापा से बड़ा है।

करण अपने उत्साह को छिपा नहीं पा रहा था और मुझे अपने लन्ड के उभार को दिखाने के लिए अपने हाथ को जींस के ऊपर से हटा लिया। मैं उसे देखकर मुस्कुराई और थोड़ी देर तक उसके लण्ड को देखती रही और उससे पूछा कि तुम मेरे शरीर को देखकर क्यों उत्तेजित हो रहे हो।

उसने कुछ नहीं कहा लेकिन वो मेरे स्तनों को देख रहा था तो मैंने अपने निपल्स की ओर इशारा किया तो करण ने हाँ कहने के लिए सिर हिलाया।

हम थोड़ी देर तक एक-दूसरे को देखते रहे और फिर मैंने कहा कि मैं बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ और मेरी शरीर की भी कुछ इच्छाएं है जो कोई मर्द ही पूरी कर सकता है। करण ने तब मुझसे पूछा कि क्या मैं किसी को खोज रही हूँ जो आपकी इच्छाओं को पूरा कर सके? पर अगर किसी को इसके बारे में पता चले तो क्या होगा। उसके कारण हमारा पारिवारिक नाम बर्बाद हो जाएगा।
मैंने कहा कि मैं ऐसे किसी और के साथ नहीं करना चाहती हूं और ना ही हमारे परिवार के नाम को बर्बाद करना चाहती हूं।

मैंने कुछ देर का मौन रखा और फिर कहा कि करण मैं तुम्हारे साथ वही रिश्ता रखना चाहती हूं जो तुम्हारे पापा के साथ मेरा था और किसी को भी इसके बारे में नहीं पता होगा।
करण को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी अपनी माँ उसे अपने पति की तरह चोदने के लिए कह रही है।
मैंने करण से फिर कहा कि इस तरह वह अपने यौन सम्बन्धों को पूरा कर सकती है और उसे भी सेक्स के बारे में सब कुछ सिखा देगी क्योंकि वो अभी जवान हुआ है।

यह सुनने के बाद करण ने स्वीकृति में अपना सिर हिलाया और मैं मुस्कुराई और उसे तुरंत गले लगा लिया और उसे गाल पर चूम लिया। करण को इसकी उम्मीद नहीं थी, खड़े खड़े मेरा संतुलन बिगड़ गया और मैं सोफे पर करण के ऊपर गिर गई।

करण ने मेरे कूल्हों को पकड़ा और गिरते समय मेरी साड़ी का पल्लू करण के मुंह पर गिर पड़ा। करण ने पल्लू को खुद से अलग करने के चक्कर में जोर से खींच दिया जिससे मेरी सदी की ग्रिप खुल गयी। करण भी पारदर्शी ब्लाउज में अपने चेहरे से मेरे गर्म दूधिया गोरे बदन को देख रहा था।

मैंने भी साड़ी पहनने की कोशिश नहीं की और उससे पूछा कि मैं उसके लिए पहने हुए पारदर्शी ब्लाउज में कैसी दिख रही हूँ। करण खुद को रोक नहीं पाया और ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे स्तनों को दबाने लगा और मैं उसे देखकर मुस्कुराने लगी।
मैंने कहा कि रुकना नहीं और फिर मैंने अपने ब्लाउज को उतार दिया और यह पहली बार था जब करण ने एक महिला को नग्न देखा और सत्य तो यह था कि यह उसकी माँ थी जिसने उसे पागल कर दिया था।

करण ने अपने दोनों हाथ ले जाकर मेरे बूब्स पर रख दिए और उन्हें जोर से दबाने लगा और मैं भी करण के होठों पर किस करने लगी। करण ने इस चुम्बन को अपने जीवन का सबसे अच्छा चुम्बन बताया क्योंकि यह मेरे अपने बेटे के साथ था। फिर हम दोनों नंगे होकर मेरे कमरे में चले गए।
मैंने करण से कहा कि मैं उसी बिस्तर में चुदना चाहती हूं जहाँ उसके पिता ने मेरा कौमार्य भंग किया था और चाहती हूँ कि वह अपनी माँ को एक जंगली बेटे की तरह चोदे और उसे वह आनंद दिलाए जिससे मैं कई माह से वंचित थी।

करण बिस्तर पर पैर फैलाकर बैठ गया। मैंने फिर करण के लन्ड को पकड़ लिया और उसके पैरों के बीच बैठ गई और उसकी आखों में देखते हुए उसके लन्ड को चाटना शुरू कर दिया और उसके पूरे लण्ड को अपने मुंह मे ले लिया औऱ चूसना शुरू कर दिया। यह करण का पहला मुखमैथुन था और यह बहुत ही कामुक था क्योंकि मैंने उसका लन्ड अपने गले की गहराई तक चूसा था। करण को जब लगा कि वो झड़ने वाला है तो मुझसे बोला कि माँ मेरा होने वाला है।

मैं उसके शुक्राणुओं को बर्बाद नहीं करना चाहती थी और मैंने तुरंत उसके लंड को अपने मुख से निकाल दिया और वो झड़ने से रह गया. अब मैंने करण को तुरंत चुदाई शुरू करने को कहा। करण बहुत ही का उत्तेजित था और मुझे चोदना चाहता था तो हम दोनों मिशनरी पोजीशन में आ गये और उसने मेरी चूत में अपने लंड को आसानी से डाल दिया और धीमे धीमे झटके देने लगा और फिर उसने रफ़्तार बढ़ा दी और ज़ोरदार स्ट्रोक देने लगा।

मैं जोर से चीख नहीं सकती थी लेकिन फिर भी जोर से ‘हम्म … आअह्ह … सस्सफ़्फ़्फ़ आअहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… भगवान … करण … आआह्ह्ह्ह … आह्म्म्म …’ जैसे शब्द निकल रहे थे मेरे मुख से!
हम दोनों माँ बेटा अपनी जिंदगी का सुख भोग रहे थे।

जैसे ही वह चरमोत्कर्ष पर पहुंचा, उसने कहा कि वह झड़ने वाला है तो मैंने उसके कूल्हों को पकड़ कर उसे और भी अधिक अपनी ओर खींच लिया और उसे अपनी चूत के अंदर जोरदार झटके और झड़ जाने के लिए कहा।
अपनी माँ के मुँह से यह सुनकर करण अब और नहीं रुक सका और मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी चूत के अंदर अपना लंड गहराई तक अंदर कर दिया और अपनी मम्मी की चूत की नहर में झड़ने लगा और उसने मुझे कस कर पकड़ लिया। यह मेरे जीवन की सबसे अच्छी चुदाई थी और मेरे बेटे के साथ नए जीवन की शुरुआत थी।

तो इस तरह मेरी माँ राम्या ने मुझे अपनी कहानी सुनाई कि कैसे उसने पहली बार अपने बेटे और मेरे बड़े भाई करण से अपनी चूत चुदाई करवायी.

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कहानी का अगला भाग: तलाकशुदा माँ की अगन-3

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